Thursday, July 14, 2022

चाय लेंगे आप

कॉफी न सही तो चाय लेंगे आप
कमबख्त अब ऐसी राय लेंगे आप
इतना मुक्कमल है मौसम का मिजाज
मेरे दिल की हाय !!! लेंगे आप

ये तन्हा भजिये चखने को परोस दिए
कहते है खाय लेंगे आप
तरन्नुम जो अनुभव का देखना है तो
बोतल खोल दो,,,आजमाय लेंगे आप




Wednesday, July 13, 2022

सावन

उल्फत होगी गर फ़िज़ा को जज़्बात न दू
सावन की झड़ी में मय को मेरा साथ न दू

अनुभव तेरे अल्फाज तुझे गूंगा न कन्हेगे 
मदमस्त होके बाबा तुझे जो आवाज न दू

हर घड़ी तेरी मुहब्बत में मदहोश रहते है
ये बेखुदी होगी जो दो बूंद तुझे आज न दु





Tuesday, July 5, 2022

इतनी सी थी  तुम ,,
जाने कब बड़ी हुई,,
कल की ही तो बात है
मेरी अंगुलियां थाम कर,,खड़ी हुई
तुतलाते ,,आँशु टपकाते,,,कहती थी
मैं टीका नही लगाउंगी
डाक्टर अंकल नहीं है अच्छे
मैं अस्पताल नही जावूगी
तुमको थामे उस टीके की टीस,,
मैं महसूस करता
मीठी गोली तुम्हारे मुख में रख कर
उतरे हुए भावों में मुस्कान भरता
फिर उस रोज जब ,,  
मैंने देखा                    
सफेद एप्रॉन पे स्टेटेथेसकोप लटकाए,,
मुस्कुराहट बिखेरती
डॉक्टर हंसिका,,
,,तुमने कहा,,
पापा ,,
अब आपकी बांहो में मैं टीका लगाउंगी
सौभाग्य !!! ईश्वर तुझे और सामर्थ्य दे
मेरी बिटिया रानी,,हैप्पी बर्थ डे,,,









Sunday, February 20, 2022

धरसा

मोर खेत के धरसा,,,
धुर्रा उड़ात
खड़ खड़ खड़ खड़ 
कन्हिया लचकात,,
सरपट सरपट भागत हे,,,

डामर पोते,,करिया होगे
डबरा नरवा,,तरिया होंगे
पुलिया ,चघिस त परिया होगे
 धुंगिया में खर्र खर्र खाँसत हे

खेड़हा,,करमत्ता,मुनगा,,मुरई
कुकरी ,,मछरी,,,औ दूध दही
रेजा मिस्त्री,,,संग नाउ बढई
सब्बो पटरी नहाकत हे

ट्राला रेती गिट्टी गोंजाय
बैला उल्ला,,,टेक्टर फन्दाय
करर्स करर्स,,हारन बजाय
सइकिल हौंडा ल तिरावत हे

धरसा हर हॉट !!बे होगे
कार ,टरक बस के होंगे
ज्महनी डेहरी येदे होगे
बत्ती बत्ती बिचकावत हे
अनुभव,,



















Tuesday, February 15, 2022

हर माल दू रुपिया

हर माल दू रुपिया,,,,,

बहुत बहुत पुरानी बात है,, तब मॉल वाल नही होते थे,,,पर एक गाँव मे एक गरीब ब्राहमन जरूर रहता था,,,खैर !! उन दिनों गरीबी की भी बात तो कुछ और ही थी,,,पैसा वाली पाकिट खनखती थी,,खन्न खन्न,नोट वाली गम्भीर बनी चुपचाप सरक लेती थी,,,चवन्नी अठन्नी ,,रुपैये की भाषा,,, बाजार में समझी जाती थी,,, चित और पट सबसे लोकप्रिय खेल था,,,
              

Tuesday, February 8, 2022

पगड़न्ड़ी

वो दुबली सी  गवांरन पगडण्डी,,, खिलखिलाती हुई हरियाते खेतों के मेड़ों से लगकर ,,गोधूलि भरे आँचल को बबूर और झरबेरी के झुरमुटों से झटकते ,,, गोबर सकेलती गुजरती है रानी तरिया के पार छोटे हनुमान मंदिर के किनारे ,,,गुड़ाखु घसते घाट पे केवटिन की चमकती तलपिया मछरी से भाव तौल पटाती,,घुस जाती है भूरे खपरैल छाँई बस्ती के बीच से ठुमकती हुई,,,और ठीक गौठान के सामने पहुच कर संजोर होकर फैल जाती है,,,,पीपल के चबूतरे के चारो ओर, पूरा गांव समेखे,, 
           पंचों ने लो हामी भर दी,,,अब पाउडर लाली  चुपड़ के सड़क हो जाओ,,फिर क्या?  सरपट कदमों से बढ़ती है पूरब की ओर,,,खड़खड़ाते एटलस सायकल के केरियर पे टिफ़िन के जरमनी डब्बे मुह लटकाए झूलते है साथ,,दूर धधकती चिमनियों की ओर,,, धुवें ने रंग अब कोलतारी कर दिया है जगह जगह इस यौवन की तेजी से स्पीड ब्रेकर उभर आये ,,तो फिर दाएं बांये का तकाजा करना ही होगा,, दुराहे अब चौराहे हो चले हैं,कतारों में धचकते ,,,पी पी करते थकान सी हो चली है अब,,ट्रक ट्रालों के संग जरा सांस तो ले लो ,,पंजाबी ढाबों की  कड़क सिकी तंदूरी रोटी,,मक्खन में पिघलती हुई और गढियाती उड़द की काली दाल पे लहसुनी छौंक संग ,,खटिये में पसर क्या गए,,,किनारे होकर काले टायरों ने मुह फुला लिया,,,चलो भी अब बढ़ते है बत्तियों से जगमगाती शहरी तहजीब की ओर जंहा के सफेद पोश चौकीदार ,,,सीटियां मार कर  रोक ही लेते है,,,लाल पीले होते,,,हरे साइनबोर्ड से झुक कर गुजरिए ,,,अब तो बिखरना हबस चारो  गजबजाती नालियों संग बिखर जाती है गलियों मोहल्लों कालोनियों में,,,खम्बों की रोशनियां ,,,बिजली तारों के संग झूलते,,,,,कंही खोपचियों में सज कर बाजार हो जाती है कंही,,,तमक कर फ्लाई ओवर उतर कर मॉल हो जाती है,,,

Tuesday, December 28, 2021

जहीन जाड़े की ओस से भीगी सुबोह,,जब सागौन की फुनगियों में,,सत बहनिया किचकिचा रही थी,,,,तब लुवे हुए खेतों की मेड़ से बंगाल रेड फॉक्स ने तीखी हुँकार लगाई,,, गुड़ मोर्निंग,, बच्चे ऐसे शुभप्रभात के अभ्यस्त नही है,,,उस रात के भी नही जो  टेंट में सिकुड़ कर धीरे धीरे बीते,,, अचानक मार्ग टाइगर रिर्जव की सीमा पे,,,नवागांव के खेतों के बीच,,,झुही माटी से पुती,,ये इमारत है,,,,छतीसगढ के बाड़े की संकल्पना के मूल को समेटे,,,आले ,,कपाट ,,,चान्दनी,, और अंगना,,,, समूची इकाई,,,बेहद करीने से की गई कारीगरी का नमूना है,,,
                 पीछे के खुले बरामदे से सागौन वृन्द की तपस्या रत सी कतार झांकती है,,,,उन से लगकर इस फार्म हाउस को विशेष बनाती है,,महुआ,,कुसुम,,खैर,अर्जुन जैसे जंगली वृक्ष समूहों की मौजूदगी,,,,एक छोटा सा तलाब जिसमे लाल टिटहरी और जल कौवे टहलते रहते है,,,,क्रिसमस अवकाश के लुत्फ के लिए इससे बेहतर परिवेश मिल सकता है क्या????
           रात में गोरसी बर गई,,,लकड़ी कोयले की गुलाबी तपन के चारो ओर,,,बृहद गप्पबाजी,,छुटपन के किस्से,,,रहस्यमयी वन कथाएं और बच्चों की होंटेट स्टोरीज,,,,कनेक्शन कर केरोके भी तैयार था,,,किशोर के गीत ,,,ये लाल रंग ,,,सारे गले गुलजार हो गए,,उफ्फ
             चूल्हे सादी दाल को भी बवाल कर देतें है,,,लकड़ी की धीमी आंच में सिके भुने,,,जायके,,, फर धनिया जनाता बैगन भरता हो या फिर सुनहरे आलू गुंडे,,,,,जीरा फूल का जुनाया चावल जब भात में तब्दील होता है,,,तो महक मदहोश कर देती है,,,,गपबाजी के बीच बार बार डबकती गर्म चाय,,,चली आती तो चर्चाओं में और जोर आता,,,,उधर लान में बच्चे तल्लीन है बैडमिंटन के खेल में इधर माताओं के स्त्री स्वर से पडकी ने गुड़ गुड़ाना छोड़ दिया,,,
        साइट सीन में पूरा दल दो भागों में बट गया एक जंगल वाक के लिए,,दूजा जंगल ड्राइभ के लिए,,,वाक के दौरान साल के घने वृन्दो के बीच की जैव विविधता से दो चार हुए,,,तो सेंचुरी की ड्राइभ ने तो चमत्कार ही कर दिया,,,,,राजा स्वयम परघाने आये,,,वन राज बाघ,,,, इस तरह ये कुटुंब यात्रा पूर्ण हुई,,,एक यादगार कलेवर में,,,,कभी न विस्मृत होने वाली स्मृतियों के संग,,,,
       धन्यवाद दीदी जीजाजी इस अनुभव के लिए