Sunday, February 14, 2021

डिजिटल उपवास,,,

मानव इन दिनों ऑक्सीजन भरोसे बस सांसे नही ले रहा,,उसे अब डेटा भी चाहिए,,,जिंदा रहने के लिए,,,इंटरनेट और मोबाइल की डंडियां,,, ई सी जी ,सी  दिल की धड़कनो को दिखाती है,,,,बिस्तर से उठने के पहले,,,मैसेज चेक होते है,,,खराब मेसेज ,,का प्रथम दर्शन ,,पूरा दिन खराब कर सकता है,,,,,,मोर्निंग वाक

Saturday, January 30, 2021

दफ्तर

दफ्तर ,,
ईंटो से नही फाइलों से बनता है,,आदिम धूल से सने,,,पीले पन्नो को किसी तरह लाल धागे से बांध कर,,फूटने से रोका जाता है,,इस बन्धन की गांठ में कई गुजरे अधिकारी ,,कर्मचारी के हस्ताक्षर कब्र के मुर्दो से धीरे धीरे सड़ते गलते है,,,आवेदक का आवेदन ,,,यानि वो बीज,,जिससे ये मोटा,, दरख़्त फला फुला,,खोजे नही मिलता,,,,मिलता है सिर्फ  पन्ने दर पन्ने  फैला सत्यम ,,शिवम सुंदरम सा ,,वाक्य,,प्रस्तुत करें,,,अबे !! अब और क्या प्रस्तुत करें,,,
    खैर ,,,फाइल के अलावा दफ्तर में टेबल भी होती है जिसमे टेबल टेनिस जैसे भावनाओ को इधर से उधर उछाला जाता है,,काम कब होगा,,,होगा,,कैसे होगा,,ऐसे होगा,,साहब कब आएंगे,,कल आएंगे,,दूसरी ओर का खिलाड़ी मंजा हुआ बाबू होता है,,,जिसका हर जवाब टेबल में स्पिन लेकर दूसरी ओर मुड़ जाता है,,

Saturday, November 14, 2020

जायके को लेकर हर इक राय जुदा होती है,,खालिस देशी रोटी भात  का आशिक चीनी न्यूडल्स ,,और इतालवी पिज़्ज़ा को फिरंगी तहजीब वाली हिकारत से देखता है,,,पर पर्सियन समोसे ,,कचोरियों के चटखारे लेने से नही चूकता,, आखिर हजार बरसों का साथ जो है,,,,,मैकडॉनल्ड के फ्रेंच फ्राई किसी हाल में देशी नही है,,,पर मेथी आलू संग पूरी के बिना,,कोई भारतीय रेल यात्रा पूरी नही होती,,आलू भी कमबख्त पुर्तगालियो की पांच सौ बरस पुरानी सौगात ही तो है,,उस हरी लाल मिर्च के जैसे,,जिसकी छोंक के बिना भारत की कोई भी करी ,,मरी हुई ही होगी,,,हमारी काली मिर्च तो दक्कन के उस पार साम्भर ,,में ज्यादा महकती है,,,इन रंग भेदों के साथ,,ही छेत्रवाद का शिकार भी लज़्ज़त की दुनिया को
     

Tuesday, October 13, 2020

जायके को लेकर हर इक राय जुदा होती है,,खालिस देशी रोटी भात  का आशिक चीनी न्यूडल्स ,,और इतालवी पिज़्ज़ा को फिरंगी तहजीब वाली हिकारत से देखता है,,,पर पर्सियन समोसे ,,कचोरियों के चटखारे लेने से नही चूकता,, आखिर हजार बरसों का साथ जो है,,,,,मैकडॉनल्ड के फ्रेंच फ्राई किसी हाल में देशी नही है,,,पर मेथी आलू संग पूरी के बिना,,कोई भारतीय रेल यात्रा पूरी नही होती,,आलू भी कमबख्त पुर्तगालियो की पांच सौ बरस पुरानी सौगात ही तो है,,उस हरी लाल मिर्च के जैसे,,जिसकी छोंक के बिना भारत की कोई भी करी ,,मरी हुई ही होगी,,,हमारी काली मिर्च तो दक्कन के उस पार साम्भर ,,में ज्यादा महकती है,,,इन रंग भेदों के साथ,,ही छेत्रवाद का शिकार भी लज़्ज़त की दुनिया को
     

Wednesday, September 16, 2020

खेत मे धान ज्यों बढ़े,,तब माहू आया,,हरा फिर भूरा,,,कीटनाशक छींट कर माहू से मुक्ति तो हो ली,,पर धान अब रसायन से लतपथ था,,,यही चावल शरीर को स्टार्च देगा,,हमारी कोशिकाओं तक रसायन की दखल,,,ये एक रासायनिक युद्ध है,,,आपके और मेरे ऊतकों में ज़हरीली रसायन की परतें चढ़ी जा रही है,,,शासन मजबूर है सब्सिडी को,,उर्वरकों ,,कीटनाशकों ,,के रूप में उत्पादक किसानों तक पहुचाने के लिए,,किसान मजबूर है,,,बाज़ार की मांग पे धान उगाने के लिए,,जहर ऊगा कर हम जहर हजम कर रहे है,,,आखिर ये चक्र कैसे टूटे,,,
             दिपावली में आपके घर जो रोशनी होती है,,उसपर माहू धान का रस पीकर मंडराते है,,,

Tuesday, September 15, 2020

उफ़ ये उन्माद का दौर है,,,,लोग चीख रहें है,,,जिंदाबाद मुर्दाबाद,,, भय ,,जय पराजय,,,खोखले सपनों और गलीच आत्मस्वाभिमान की प्रवंचना का दौर,,,,,,हमारी आंखों का मोतियाबिंद पकने लगा है,, इलेट्रॉनिक मीडिया के निर्लज्ज  कैमरे हाँफते हुए दौड़ रहे है,,,,रिया के पीछे ,,,,कुछ तो बताइए,,,,क्या आपने मारा राजपूत को,,,, गांजा पीती है,,,,देश जानना चाहता है,,,,,कई स्वघोषित अभिमन्यु ,,चक्रव्युह में अकेले योद्धाओं से भिड़ रहें है,,,,,
            राफेल ,,,,अपाची ,,,न जाने कितनी मिसाईल बीजिंग और इस्लामाबाद में छोड़ आये,,,हम जीत चुके है,,हिंदुस्तान जिंदाबाद,,,गदर फ़िल्म का नायक तारा सिंह नारा लगा रहा है,,,,कभी यही मीडिया ,,खबर दिखाती थी,,पाकिस्तान करोंना में तबाह हो जाएगा,,अब डब्लू एच ओ,, ने प्रशंसा कर दी तो फिर ,,क्या कहें,,,,,
                       प्रश्न ये है,,कि क्या करोंना के वायरस ने मष्तिष्क में खलल पैदा कर दी है,,की हम नीद में भी बड़बड़ा रहे है,,,आपदा के दौर में ब्रिटेन के सबसे अतिवादी नायक चर्चिल ने अपने देश के लोगों को प्रलाप से बचाकर,,, प्रयास में जुटाया था,,,परिणाम था,,हिटलर की वायुसेना के पूरे बम समाप्त हो गए,,पर ब्रिटेन टस से मस न हुआ,,,,तो साहिबान खोखली खबरों के चटखारे पेट का हाजमा ही खराब करेंगे,,,,,,लब्बोलुआब यह है,,कि ग्लेडिएटर के दर्शकों की तरह,,,सत्ता को प्रेरित न करें कि आपको खूनी कुश्ती का नजारा दिखाए,,,,,युद्ध उन्माद हो या फिर आत्महत्या की शहीद कथा,,,,,ऐसी खबरों से बेहतर है,,, किसी पेड़ की पत्तियां गिन लें

Sunday, September 13, 2020

हिंदी दिवस को मैंने उसे,,,
गन्दी गाली दी
क्यू कि,,, 
इसी वर्तनी का बचा अर्थ था
 ,,शेष व्यर्थ था,,