मुड़ी जो मुड़ी तो फिर मुड़ गई
उस्तरे से उस तरह से सारी चुन्दी उड़ गई
Saturday, September 28, 2019
बरहा और जेपरा
जेपरा औ बरहा,,
धकर लकर झाड़ चघा,,औ झाड़ कौन ,,बमरी ,,कांटा कुण्टी ले छेदा गया जेपरा,,लुंगी छूट गया रह गया ,,हरियर चड्डा और लटकता नाड़ा,,,फेर नई उतरा,, काबर नीचे बरहा छेक के बैठा जो था,,घों घों करता ,,,,,,जेपरा का हाथ गोड़ खोर्रा गया था,,लहू बोहा रहा था,, घों घों ,,,सारा बेटा खेत मे खोन्दरा तान के,,पीला दे दिया,,,अब कर ले लुवाठ खेती किसानी
धान खेत के बिच्चो बीच,,,जंगली सूरा का खोन्दरा,,जेपरा आवेदन धरे किंजर रहा,,ये आफिस ले ओ ऑफिस ,,तहसीलदार किथे,, जंगली जीव है माने बनविभाग का मामला,,,रेंजर साहेब बोले,, आधा नुकसानी में होता है मुमावजा या फेर गोड़ हाथ तोड़वाये मे,,,खोरचाये हपटाये का कोई हिसाब नही,,, ,,जंगल गार्ड भेज के खेदवा देंगे, ,,दु हप्ता पहिले,,फेर वहा रे विधान आज ले कोई सुध नही ले रहा,, औ बरहा घेरी बेरी होदरने करता है,,,बिककट अल्हन है भाई,, सूरा मार सुतली बम में आटा लपेट के रात के डार दे,, सरपंच का आडिया है,, किसे करबे,,
बिहिनिया खार में सूरा छर्री दर्री पड़ा था,,,जबड़ा फूट गया ,,अब क्या,,, भून के मास खाओ खतम करो,,,जम्मो पंचायत खाया बांट के ,,फेर कम नही पड़ा तो सोखा दो,,बिककट मिठाया रहा,,जेन नई चखा ,,कल्लायेगा ही,,सब्बो अधिकारी एक्के दिन धावा मारा दिया,,,सोखडी मांस,,बयान,,मौका जांच,,पंचनामा,,, बनपशु को मारा,, है खाने खातिर,,,कौन कौन खाया सब्बो अंदर,,,होगा,,,,रेंगजर साहब धार्मिक मनखे था,, बिष्णु अवतार को मार दिया रे,,बराहा अवतार,,हा ,,हा ,,हा गम्भीर धारा लगेगा,,जेपरा उखरू बैठ के सोंच रहा था,,, मोला होदरत रिहिस तो ओखर उप्पर कोनो धारा नई,,वाह रे कानून एकतरफा, पेला रहा है,
सरपंच गार्ड से गोठिया रहा है,,समाधान निकले साहब तो सब्बो का भला हो,, मामला जम गया दिखता है,,, गरुवा डाक्टर पोस्टमार्टम कर दिया,,,देवार डेरा का देशी सूरा है,,,,जंगली पशु अधिनियम में नही आता,,,जेपरा का जान बच गया,,फेर धान,,, एक गाड़ा बेंच के हुआ ऊपर से निच्चे तक का मुवावजा चुक्ता,, धान खेत ले अभी भी आवाज आता है,,घों घों,, फेर जेपरा अब नई भागता,,, क़ानून बोला है,,देशी सूरा है
अनुभव
Sunday, September 1, 2019
पीहू
बिटिया ,,तुम बड़ी होकर कुछ बन जाना
ठीक है बन जाउंगी,,
क्या बनोगी ??बताओ जरा
अभी नही बताउंगी
जब बड़ी होंवूगी ,,
तब ,,सीधे बनके दिखाउंगी!!!!
पापा की पीहू को हैप्पी बर्थ डे,,,
Saturday, August 17, 2019
चार चिन्हारी
चार चिन्हारी,,
जब प्राथमिकताएं बदलें तो पहले पहलअचरज आम बात है,,,बड़ी विकास योजनाओं की जगह जिक्र नरवा गरवा घुरवा बारी का हो,,तो प्रश्न लाजमी हो जाता है,,कि,, आखिर क्यूँ,,,,,प्रगति की प्रकृति जितनी जमीनी होगी,,विकास उतना समानवेशी होगा,,छतीसगढ़ के,गढ़ रायपुर,, दुर्ग ,बिलासपुर जैसे नगरीय केंद्रों,, के स्रोत हमारे ग्राम्य और वनप्रदेश है,,,भिलाई इस्पात संयंत्र या उरला के कारखानों के बहुत पहले से यंहा का उद्यमी किसान ,,बनिस्बत कम उपजाऊ लाल माटी में ,,,अपने तकनीकी ज्ञान से दुबराज ,,जवां फूल की सुनहरी बालियां उगाता आ रहा था,,मूलतः माटी के इसी जुड़ाव से छत्तीसगढ़ की भाषा,,नृत्य,,आहार,,पहनावे,,का जन्म हुआ है
,,,जो कभी धान के खेत नही बूड़ा ,,वो छत्तीसगढ़ को गेंड़ी चढ़ कर ही देख रहा है,, बात नरवा की हो तो ये हर गाँव के आसपास से मानसूनी जल को भूजल से जोड़ने वाली आदिम धरातलीय जल रेखाएं है,, जिसमे डुबकियां लगा कर यंहा का बचपन जवां होता है,,गरवा हमारा वो पशुधन है जो आधुनिक कृषि व्यवस्था के चपेट में आकर अब जुगाली करता,,आपकी गाड़ी का रास्ता रोक लेता है,,पर छेने पे सिकी कपूरी रोटी आज भी उतना ही सुवाद देती है,,देशी गाय के घी की छौक आज कितनो की किस्मत में है,,गोबर्धन पूजा ही छतीसगढ़ की असली दीवाली है,,
घुरवा यंहा के वो प्राचीन उर्वरक कारखाने है जिनसे निकले गोबर खातू से यंहा का चावल दुनिया की सबसे सुगन्धित महक से महकता था और बारी ,थे,आदिम हार्टिकल्चर फील्ड ,,हमारे स्थानीय देव ,,देविया,,भी इन्ही संसाधनों की रक्छा प्राचीन काल से कर रहे है,, अरपा ,,पैरी के धार,,या मोर संग चलव जी जैसे गीतों के बोल,, उस आदिम प्रेम के रूप में आज भी आंखे गीली कर देती है,,ऐसे में अर्थव्यवस्था के आधुनिक प्रतीकों से भिन्न नरवा गरवा घुरवा बारी,,एक ऐसा विकास मॉडल है जो हमारे पर्यावरण के साथ हमे उठने में मदद करता है,,सतत विकास के उस वैश्विक संकल्पना से हमे जोड़ता है जो अन्धाधुन्ध,,संशाधनों के दोहन से भिन्न आने वाली पीढ़ियों को ध्यान रखकर सन्तुलन को अपना लक्छ बनाती है ठीक है कि पोरा की बैल जोड़ी की जगह ट्रेक्टर ने ली है पर हमारे विश्वास और इतिहास ,,के ही ये चार चिन्हारी अब एक नया प्रतिमान गढ़ेंगे,,
अनुभव
Wednesday, July 24, 2019
कत्थई केचुआ जब गीली मिट्टी को भेद कर निकला तो वही पास लाल चीटियों के पंख निकल आये थे ,,मैदान के चारो ओर फैली हरी दूबी के बीच छोटे गड्ढो में सोए मेढक जाग चुके थे और,,प्राचीन ओपेरा प्रारम्भ हो गया ,,,पीले फूलो से काली पीली तितली ,,ने रस पिया तब चुपके से ,,उनके पराग माथे पर चिपक लिए,,अब वो कंही दूर जाकर नए रंगों में खिलेंगे,,, पिट पिटी सांप ने मुह खोल कर छोटे केकड़ों को निगलना शुरू किया,,,कि ऊपर डंगाल पे बैठे नील कण्ठ की टी टर्राहट ने उसे दुबकने को मजबूर कर दिया,,,,बादल काले होकर जब सफेद बगुलों के पास से उड़ने लगे,,तो चिरई जाम के झाड़ के नीचे की जमीन जामुनी हो गई,,,और कुकुरमुत्ते ने छाता तान लिया,,,बारिश झरने लगी,,,,,या फिर जिंदगी ,,,पतली भूरी नालियों से होकर मैदान में पसर गई,,,कनखजूरे के बिल में पानी भर गया,, और खुशी भी जिससे ,,,भूरी मैना तो गीली होकर,,,फूल गई,,,ये नीले समुन्दर से उठी ,,उन बूंदों का कमाल ही तो था ,,जो छन कर आसमान से बहते आई ,,और फिर चमकते हुए,,,नीचे बरसी ,,,ये फिर उड़ जाएंगी ,,पर इंद्रधनुषीय रंगों को बिखेर कर,,,
Saturday, July 20, 2019
भीड़ की भाषा
भीड़ की भाषा,,
हमारे देश में सदा से ही मदारियों ,,साँप नेवले का रस्ते मे सस्ते खेल देखने का रिवाज रहा है,,,,जमूरे और उस्ताद का डमरू एक बार डम डमाया और भीड़ ने गोला बना लिया,,,,भीड़ जिसमे कई मोहन,, सोहन समारू बुधारू एक सा कौतुहल लेकर झांकने लगते है,,,इस सामुहिकता में भयंकर ऊर्जा भरी होती है जो कभी तालियों में और ज्यादातर गालियों में प्रकट होती है,,,मुर्दाबाद मुर्दाबाद,,जिला प्रशासन मुर्दाबाद,,,फलाना ढिकाना मुर्दाबाद,, और जब इस भीड़ के रेडियोएक्टिव सदस्यों के नाभिक में कोई उतेजक या भावुक घटना प्रहार करती है तो
फिर होता है विस्फोट,,,
विषय जितना भावुक,,उतना महाविस्फोट,,
गौकशी से लेकर किसी सड़क दुर्घटना में मरी बच्ची का मामला हो,, लोग जुटते जाते है,,भावुक होने के लिए पहले ज्ञान अर्जन करते है,,क्या हुआ,,कौन था,,अच्छा तो अब ये भी होने लगा,,
विरोध होना चाहिए,,कल्पना कीजिये अपने परिवार के साथ गवई गावँ में शाम के वक्त कंही जाते हुए यदि आपकी गाड़ी किसी से टकरा गई तो नजारा सोंचिये,,, शराबियों की न्यायपालिका,, ऑन द स्पॉट डिसीजन,,,मारो,, और फिर पब्लिक कुटाई,,आज पूरे देश मे ऐसी माब लीचिंग की संस्कृति फैल रही है,,,समूह में शामिल हर एक शख्स अपने व्यक्तिगत दर्द को तात्कालिक समस्या से जोड़ लेता है,,और उसका इलाज तत्काल चाहता है,,
प्रशासन भीड़ से जब बात करता है तो ज्यादातर लोगों के खुद का दर्द निकलता है,,क्या बात करते हो साहब,,,जब से मांग कर रहे है शराब ठेका बन्द हो,,हुआ,,शराबी तत्काल विषय को बदल देगा,,,स्पीड ब्रेकर क्यों नही बना,,रिश्वत खोर है सब,,,मोला अभी तक इंदिरा आवास नई मिले हे,,, हजारों समस्याएं,, कई नेता,,कुछ क्रांतिकारी ,,आग लगा दो टाइप,,जरा मांगे देखिये,,पीड़ित को शासन द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि से चार गुना अधिक राशि,,अभी दो,,,परिवार के सदस्य को नॉकरी,,शहीद का दर्जा,,,एक्सीडेंट में मृत को अभी दो,,,आदि आदि,,,नही तो मुर्दाबाद मुर्दाबाद,,,ऐसे में यदि थोड़ी भी चूक हुई तो अधिकारी भी पिटेगा,,,और पुलिस भी पत्थर खायेगी,, कानूनी उपचार में लाठी चार्ज से लेकर गोलीचालन तक उपलब्ध होते हुए भी सबसे सार्थक इलाज है चर्चा ,,जो धैर्य की पूरी परीक्छा लेगी
मौके के अनुसार ,,,लिखित में सारी मांगे मंजूर है से ही सभा समाप्त हो सकती है,,
बहरहाल माब लीचिंग वानर काल से ही हमारे डी एन ए में मौजूद है,,,लोकतंत्र के मंदिर में भी कभी कभी ऐसी घटनाएं होती रहती है,,पेरिस की बेकाबू भीड़ ने ही आखिरकार बेसिल के पतन से गणतन्त्र की नींव रखी थी,,,पर जब नेपोलियन ने देखा कि ये भीड़तंत्र आदत में शुमार हो गया है तो उसने तोप का मुंह भीड़ की ओर मोड़ दिया,,,माब लीचिंग की बढ़ती संख्या को भी अब कठोर कानूनी कार्यवाही की दरकार है
Friday, June 21, 2019
मानसून
पर्यटन को निकली बूंदे,,
नीले सागर से उठकर कारे बादर चढी
फिर मेरे आँगन ,,टिप टिप बरस पड़ी
स्वागत है चिर अतिथि,,अपनी महक बिखरा दो
जल भून गई भूरी माटी,, शुष्क हृदय हरिया दो!!!