Friday, June 21, 2019

मानसून

पर्यटन को निकली बूंदे,,
नीले सागर से उठकर कारे बादर चढी
फिर मेरे आँगन  ,,टिप टिप बरस पड़ी
स्वागत है चिर अतिथि,,अपनी महक बिखरा दो
जल भून गई भूरी माटी,, शुष्क हृदय हरिया दो!!!

Saturday, June 1, 2019

बेहरम है वक्त साथी जाग अब
मजिस्ट्रेट मुर्दा रहे मुमकिन नही
संगठन के शान पे है मकड़ियां
दिल जले गुर्दा जले,, पर महफ़िल नही
आहवान करती है ,, हमारी अस्मिता
साथ हो तो कोई मुश्किल,,, मुश्किल नही

Saturday, May 25, 2019

तरन्नुम तर्जे तकिया,,तहजीब तबे है
मजहर तेरे मुक्कदर ,,मकदूल बजे है

बरबट्टी आलू

कांसे की थाली में एक ओर गर्म भात ,भूरी दाल,,,  तिल छिटकी बिजौरी,,,,और कोने में बरबट्टी आलू,,,माँ के हाथ सन कर कौर  गाँव ,,,औऱ नगर बन जम गए,,,राजिम,,रायपुर,,,नवापारा,,और कुकेरा,, निवाले पे निवाला,,,गर्म है तो फूंक लो,,,मिरची है तो थोड़ा पानी,,,स्वाद वो जो आज तक जीभ भिगो देता है,,,नारियल का तेल बालों

Friday, May 24, 2019


जुबां में जहर,,
इरादों में तेजाब है
पर सब कुछ माफ है
ये बताइये,,बरखुर्दार
आप कौन सा छाप है

Friday, May 10, 2019

गणित का माफिया राज

गणित का माफिया राज,,
हमारे स्कूली पढ़ाई के दौर में एक विषय ,,का माफिया राज था,, इज्जत और ख़ौफ़ का दूसरा नाम  ,,गणित,,गधे और होनहार का फर्क वही तय करता,,गुरुजी की छड़ी की गूंज से उस पहाड़ की चढ़ाई शुरू होती ,,तभी तो उसे कहते थे पहाड़ा ?? क्लास दर क्लास ये चढ़ाई बेहद दुर्गम होती जाती,,,अंकगणित, बीजगणित
के पथरीले रास्ते से,,त्रिकोणमिति,,छेत्रमिति,,समुच्चय,,जैसी अभेद्य चोटियां,, ये माफिया भविष्य के होने वाले कई कला ,,भाषा प्रेमियों की गर्दन प्राथमिक शाला में ही मुरकेट देता,,और आधे बच्चे पहली बोर्ड परीक्छा तक पढ़ाई से पलायन कर लेते,,
              गणित माफिया की सांकेतिक भाषा भी थी,,जबकि जमाएं,,,माना कि,,तो ,,,इसलिए,,,ले दे के विद्यार्थी एक्स ,,वाई से जूझता हुआ,,,उत्तर तक हलाकान परेशान पहुच भी गया,,तो इति सिद्धम गड़बड़ा जाता,,,लेफ्ट हेंड साइड ( Lhs) कभी राइट हेंड साइड (Rhs) से मिल नही पाता,, भूसी दक्छिना में एकमात्र राहत थी,,प्रोसीजर में भी अंक मिलते है,,,ये भाषा आगे जाकर जब अल्फा ,,बीटा की बदतमीजी में उतरती तब तक रसायन और भौतिकी के मैदान में भी गणित के गुर्गे न्यूमेरिकल बन कर उतर जाते,,शुरुवात में तो लाभ हानि,,प्रतिशत जैसे मामले दुनिया से जुड़े लगते भी है,,,पर धीरे धीरे इंटीग्रेशन ,,डिफ्रेंसिअशन की अंकीय कलाबाजियां आती जिसका सीधी जिंदगी से कोई सम्बन्ध नही होता,,,इतिहास भूगोल यँहा तक जीव विज्ञान वाले भी,,,अपने ज्ञान को इस दुनिया से जोड़ लेते,,पर इस गणित के अंडर वल्ड का सारा काम दुनिया से छुप कर हट कर चलता,,, हर माता पिता इस अंडर वल्ड का सम्मान करते,,,गणित पढ़ा तो इंजीनयर बनोगे,,मेडिकल में सीट कम होती है,,,इतिहास पढ़ के क्लर्क बनना है क्या,,टाइप,,,इस ख़ौफ़ में कई अन्य विषयों के प्रेमियो की बलि चढ़ा दी जाती,,थोड़ी राहत कामर्स लेकर भविष्य में सी ए बनने का स्वप्न देखने वालों को जरूर मिली,,पर इज्जत का ठेका तो  गणित के पास ही था,,,सोंचता हु सही समय पे प्राइवेट
इंजीनियरिंग कॉलेज खुल गए,,नही तो गणित प्रभावित इन पीड़ितों का पुनर्वास कन्हा होता,,,ये बात तो तय है कि गणित के राज में आज का भारत सॉफ्टवेयर उद्योग में ठीक ठाक कर रहा है,,परन्तु मुझे  पूरा विश्वास है कि शायद इस माफिया राज का इतना दबाव नही होता,,तो इस देश मे कम से कम दस पन्द्रह रवीन्द्रनाथ टैगोर,जैसे साहित्य नोबल पुरस्कार विजेता और हुवे होते,,जिनकी प्रतिभा की हत्या प्राथमिक शाला में हो गई थी

अनुभव

आँवले के झाड़ में,,,आम फल गए थे,,,पूरे गाँव मे हैरानगी थी,,,कुछ आम तोड़े गए,,,चखे गए,,,सुवाद तो आंवले का है,,दिखता आम है,,,खट्टा होता है ,,आम हो या आंवला,,
नही भाई,,,, अभी पक लेने दो,,तब होगा फैसला,,,
आम पक गए,,आंवले नही थे,,,,प्रश्न