Sunday, September 13, 2020
भाषा अब वो जूठन है जो कचरे में फेंक दी जानी चाहिए,,आज के इंसान को संवाद के लिये क्या भाषा चाहिए,,,क्योंकि हम जो बोल रहे है,,,वो डाटा है भाषा नही,,,, शोले में गब्बर कहता है,,कितने आदमी थे,,,आज की पूरी भाषा ही ऐसी है,,,डाटा बेस,,, जब हम सम्वेदनाओं की जगह केवल फैक्ट्स का आदान प्रदान कर रहे है,,,,,कैसे हो ,,,वाट्स एप,,मेसेज,,,बेहतर,, उत्तर,,,कन्हा हो,,,ऑफिस,,कब आओगे ,,शाम तक,,फिर मिलते है,,,,भाषा शुध्दि की
Wednesday, September 9, 2020
कायर
कायर संग कोविड की कारस्तानी,,,,,एक चेतावनी
देश की सरहद में ,जंगे हालात है,, चीनी सेना इस जद्दोजहद में है कि हमारे उत्तरी अभेद्य हिमशिखरों के दर्रों से होकर ,,,हिन्दुसानी शाख को दुनिया के सामने राख कर सके,,पर हमारे सेना के जज़्बे और तैयारी को सलाम ,,,चीनी चूहों को अब तक वो दरार ही नही मिली कि उनके नापाक इरादे कामयाब हो सके,,,,,क्या यही मुक्कमल तैयारी हमने ,,,इस चीनी वायरस के खिलाफ भी कर रक्खी है जो हमारे घर परिवार के दरवाजे दरार खोज रहा है,,,शायद नही,,,,,आंकड़े तो यही कह रहे है कुछ दिनों से कई जवां मौतों की खबर रोज का किस्सा हो चला है,,हृदय घात,,,, क्या ये सम्भव है कि 40 ,,50 उम्र के चलते फिरते लोग यू अचानक कार्डिक अरेस्ट की चपेट में एक साथ रुख सत ले रहे हो,,जनाब ये सीधा इशारा है,,,हम करोंना के दहशत ओर अफवाहों की गफलत के शिकार है,,,ताजुब्ब होता है कि वाट्स एप की ग्रुप के जहीन ओर तथाकथित दानिशमंद लोग,,,करोंना टेस्ट का न केवल विरोध कर रहे है बल्कि दुसरो को भी अपनी जहालत का शिकार बना कर ,,टेस्ट कराने से रोकते मिलते है,,ये अपराध है,,,किसी भय से कांपते शुतुरमुर्ग के जानिब रेत में सर छुपाने जैसा,,, और इस बकवास का नतिजा भुगतते है आप,,आपके अजीज,,,जब कोविड आपके फेफड़ो में काई की तरह अपनी बस्ती बना लेता है,,तब सीरियस लम्हो में हम आई सी यू के लायक ही रह जाते है,,जंहा अब तिल भर की जगह नही,,,सभी नामी गिरामी हस्पताल अब लबालब है,,,क्या कीजियेगा,,अपने परिजनों के धीर्मी पड़ती सांसों में प्राणवायु फुकने के लिए,,,,अपराधी आप खुद है
राज्य शासन ने हर स्तर पे तैयारी कर रक्खी है,,,पर सबसे जरूरी है टेस्ट,,,,हम घर मे खांसते खाखरते ,,,खुद के डर को छुपाते ,,,यह यंकी कर चुके है कि मौसमी बुखार है,,,अरे धिक्कार है,,,जब रोज आपके चारो ओर चिताएं जल रही हो तब इतनी असावधानी,,,आज हमारे पास करोंना से लड़ने के सभी साधन मौजूद है,,वो भी घर मे बैठ कर,,पर तब जब शुरुआत में ही टेस्ट हो जाये,,जंहा दो तीन दिनों की देरी हुई ,,मतलब चीनी वायरस की चौकियां आपके फेफड़ो में जम जाएंगी,,ओर हस्पताल का एक बिस्तर नाहक ही आपकी गलती से भरेगा,,,जो हमे पहले ही पता लग जाये ,,की मर्ज क्या है होम आइसोलेशन के सहारे घर पर ही 9 से 10 दिन में करोंना की हार तय है,,पर पहले हम अपने डर से तो जीते
मुझे यंकी है सरहद में हम मुस्तैद है पर क्या ये मुस्तेदी घर पर जरूरी नही,,जंहा दांव पर बस आप नही आपके बुजुर्ग,,बच्चे पड़ोसी सभी लगे हो,,,पिछले 14 दिन के अपने अनुभव से ओर ऐसे शुतुरमुर्गी प्रतिभाओ से बात कर यह कटुता मैंने पाई है जो उगल रहा हु,,,,करोंना का टेस्ट ही आपको ओर परिवार को बचा सकता है,,साथ ही शासन के संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने का रास्ता बनाता है,,इस लिए हे न्यूज चैनल में देश प्रेम का रसास्वादन करते बुद्धि जीवियों,,,सरहद की चिंता छोड़ो,,पहले अपने घर की दरारों पे मुस्तैद हो जाओ ,,ओर भगवान के वास्ते लक्छण मिलते ही टेस्ट करवाओ
अनुभव ,(टेस्ट और होम आइसोलेशन के भरोसे आज 14 दिन बाद मेरा परिवार भी सुरक्छित है)
Tuesday, September 8, 2020
Thursday, August 20, 2020
Monday, August 17, 2020
pora
पोरा तिहार के सजे बाज़ार से माटी के बैल जोडे और चुकिया बिसा लाये,,,,,इन मृण्मूर्तियों से आज सभ्यता की कहानी शुरू हुई ,,,कहानी उस दौर की है जब जंगल की एक घांस को हमने खेतों में उगाना सीखा,, बैलों के संग हल से खेत जोत कर पहले पहल ,,माटी के भीतर से सभ्यता की कथा शुरू हुई,,,त त त त,,,राजस्थान के कालीबंगा में हल से जुते खेत के साक्छ यू तो 5000 वर्ष पुराने है,,पर लोहे के फाल वाले हलों ने बुद्ध के दौर में नगरीय क्रांति ही खड़ी कर दी,,,चमचमाती कारों के दौर से पहले इन्ही बैल गाड़ियों से राहें गुलजार रहती थी,,जिसकी बानगी राजकपूर की रेणु कथा पे आधारित फ़िल्म तीसरी कसम में देखिए,,इस कर के,,प्रेमचन्द ने अपनी कथा में हीरा मोती बैलों को नायक चुना,,,जो बैलो का साथ न होता ,,तो क्या होता,,
आज इतिहास का कालक्रम मृदभांडों पे आधारित है,, हर सभ्यता की पहचान उस दौर के विशेष मृदभांडों से होती है,,काले लाल ,,सैन्धव सभ्यता,, उत्तरीय ब्लेक एन्ड पॉलिश्ड पोटरी बुद्ध के काल के ,,लाल कुषाण कालीन मृदभांड,,,इस कुम्हार कला का ही सम्मान है पोरा तिहार,,,चुकिया,,चक्की की पूजा,,इन खिलौनों के साथ हमारी ग्रामीण संस्कार बचपन को दिक्छित करते है,,,,, इस त्योहार का जायका भी जुदा है ,,,कुर मुरी ठेठरी और खस खसी ,,खुर्मी ,,,,देशी सुवाद से लबरेज,, कूट रूंग कूट रूंग खाइये,,,,,हमारी किसानी तहज़ीब के इस तिहार पोरा की सभी को हार्दिक बधाईया,,
अनुभव
Monday, August 10, 2020
कोबिड
कहत कोबिड रे! मनखे जात
जम्मो दुनिया तन्हि कमात
आनी बानी के जीव औ प्रान
काबर जनमिस होही भगवान
बाढ़ गे तोर अस अत्याचार
तेकर सेती ले हव अवतार
थोथना ढाँके ले नई मिले परसाद
बेक्सिन खोज ले मनु के औलाद
Thursday, August 6, 2020
नाना जी
हमारे नाना जी कमाल के जादूगर भी थे,,उनके कई तमाशो के चश्मदीद हमारा छुटपन रहा,,,,सुबह बरामदे की तखत में उनकी बैठक जमती,,सामने की खिड़की से सूरज की रौशनी ग्रिल से छनती हुई दीवार पे बिखरती होती जिसमे तैरते गोला बीड़ी के धुंवे के छल्ले के बीच एक जादुई मंच बना जाता,,बिखरे सेविंग किट,,के बीच सिह सिह करती नानी के हाथों चीनी मिट्टी के कप में जब तीसरी चाय सुडुक जाती तब कंही वो खेला प्रारम्भ होता,,,उस दौर में बच्चों के लिए,,,रंग बिरंगी बाँटिया बहुमूल्य निधि होती थी,,,नाना जी पहले दोनों हाथों को मसलते,, फिर हमें दिखाते,,,खाली है ,,दर्शकों की सहमती,,, खाली है,,,अब देखो,,,ध्यान से ,,,,और मन्त्र उच्चारण जिसे हम कभी समझ न पाए,,,फिर दन्त हीन मुख से बाँटिया एक एक कर बरसने लगती,, बाटियों की ताबड़ तोड़ बारिश,, सबके हिस्से जादुई बाँटिया बट जाती,,,बजाओ ताली,,तड़ तड़ तड़,,,काफी बाद में जाकर पता लगा,,की पृष्ठभूमि में खड़ी छोटी मौसी इस जादुई खेल में उनकी सहायिका थी,,बांटी पीछे मुड़े हाथों तक पहुचाने में,,,एक शरारत भरा खेल भूत दिखाने का भी होता,,जिसके चपेडे में कोई एक बार ही आता,,, वो देखो भूत ,,कंहा ,,,बच्चा ऊपर खोजता,,,वो दे रे बुजा के,,,कंहा,,और फिर सुलगती बीड़ी चुट से पैर में जलती,,,बाल क्रंदन की ध्वनि से पूरा माहौल गूंज उठता,,,और नाना जी की हंसी,,,उहि तो है रे,,,खिन्नन्नंन्नं भरी नाना जी की हंसी जीभ निकाल कर खांसते हुए ही समाप्त होती,,,,,,ऐसे कई जादुई खेल रोज की दिनचर्या में शामिल थे,,,पर ये ऐसा खेल था जिसका टिकिट का पैसा भी आखिरकार हमे ही मिलता,,,गोल चवन्नी,,वो भी उनके कान से निकली हुई,,,,,,,,बाल मनोविज्ञान के सभी प्रयोग उस दौर में हम पर हुए,,,आज वो स्मृतियां ही किसी जादुई लोक की लगती है
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