Wednesday, January 22, 2020

दस्ताने डेंगू,,

जिले में महामारी फैल रही थी,,,साला ! एक मच्छर आदमी को मुर्दा बना रहा था,???,,,जोड़ों में दर्द,,तेज ज्वर,,और रक्त प्लेटलेट्स में कमी,, यानि डेंगू ,,, मौत का सैकड़ा पूरा होते ही ,जिल्ला प्रशासन की,,एक बेहद आकस्मिक ,,आपातकालीन,, और गोपनीय बैठक आहूत हुई,,,एजेंडा था ,,,मुकाबला डेंगू से,,
              दरबार सजना शुरू हुआ,,,सभागार में समूचे जिले के कोने कोने से अधिकारी पहुच रहे थे नमस्कार सर,,नमस्कार नमस्कार,,,अग्र पंक्ति में अपर जॉइंट डिप्टी कलेक्टरों की जमावट दूसरी ओर जिला पंचायत, पीडब्लूडी,एरिगेशन जैसे विकास  विभाग और अनुविभाग के सँजोर नायक ,,आबकारी शिक्छा परिवहन जैसे सुदृढ़ सरदार,,, विराजमान ,तत्पश्चात,पीछे की पंक्तियों में तहसीलों  से आये कुछ ऊंघते से अनमने योद्धा,,कुर्सीयां  कम पड़ रही है,,,,,झुंझलाता छोटा अधिकारी ,,बड़े अफसर को कुर्सी सम्मान सहित सौपता है,,,गजटेट वर्ग क्रम में अपनी ओकात का ध्यान रखना सिविल सेवा आचरण का प्रथम नियम है,,हाजिरी रजिस्टर के आते ही सभागार में हलचल के साथ हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत हुई,,, हल्की फुल्की प्रोटोकाली हँसी,, और सब्जी बाजार से कुछ कम गूंज वाली वार्तालाप से महफ़िल गुलजार हो रही थी,,,कि अचानक,, लाल टोपी धारी संकेतक का प्रवेश
   यानि,,सावधान,,,जिलाधीश महोदय का आगमन,,,सट्ट फट्ट की आवाज के साथ पूरी पलटन खड़ी हो गई,,,साहब के विराजमान होते ही,,,,पुनः सभी उसी गति से  पसर गई,,एकदम किनारे बैठा कार्यवाही लेखक कलम लेकर मुस्तैद ,,साहब ने पूरे कच्छ को एकबारगी फोकस किया,,,,एडिशनल साहब ने निगाहों से ही बता दिया कि उपस्थिति पूरी है,, ओके,, शुरू करें,,तो आज का एजेंडा है,,डेंगू
               फाइल खुलने लगी,, एडिशनल साहब ने आंकड़ों की पहली लड़ी बिखेर दी,,,अब बॉल स्वास्थ्य अधिकारी के पाले में थी,,,जो प्रस्तावना में डेंगू की बारीकियों से होते हुए,,,एक एक स्वास्थ्य केंद्र की तैयारियों की जबरजस्त व्याख्या कर रहे थे, डॉक्टर कम है कर्मचारी भी कम है,,दवाई भी थोडी कम है, मांग पत्र भेज दिया गया है,,सविंदा नियुक्ति जारी है यानि कि,, व्यवस्था चाक चौबंद है,,पर महामारी का मूल है तो है गन्दगी,,,अब निगम अधिकारी ने गेंद सँभाली,,,नाली टू नाली ,,की सफाई की स्ट्रेटजी से लेकर घुरवा प्रबन्धन के क्रियान्वयन तक ,,विस्तृत रिपोर्टिंग,,,किन्तु,,,जब तक घरों में कूलर और गमलो में जमा पानी नही खाली होगा ,,मच्छर भुनभुनाते रहेंगे,,,जनजागरूकता सबसे जरूरी है,और,डी डी टी का छिड़काव भी,,  पी एच ई के ई- साहब बिना बताए अनुपस्थित है,,, कारण बताओ नोटिस जारी हो,,मीटिंग का प्रथम निर्णय,,,मादा शब्द का उच्चारण को सुनते ही ऊंघते हुए महिला बाल अधिकारी चौंक गए ,,पर ये जानकर की बात मादा मच्छर की हो रही है तो फिर से छोटी मीठी नीद के आगोश में समा गए,,,इसी तरह कई लोगों की तन्द्रा,नाश्ते के गर्म आलू चाप और चाय की महक से टूटी,,पर अंतिम पंक्ति तक पहुचते चाप और चाय दोनों जुड़ा गई ,,,
             

Monday, November 25, 2019

चपड़ासी का नाम था घांसी,,,, उसकी विशेषता थी भयंकर खांसी,,और काम था,,सुबह से कोने पे बैठ कर ऊँघासी,, संज्ञा सर्वनाम और विशेषण का अद्भुत समन्वेशी चरित्र,,,सैतीस बरस के कार्य अनुभव ,,को बीड़ी के धुंवे में दिन भर फूंकता रहता,,,सुबह तहसील दफ्तर का किवाड़ खोल कर बीते दिन के सारी गन्दगी और यादों को पीछे कूड़े में उलेड आता,, और एक पुराने अंधेरे कोने में,,टेबिल पे पसर जाता,,  पूरे दिन के प्रोटोकॉल में साहब के आने जाने पे  खड़ा होकर नमस्ते,,और 

Tuesday, October 15, 2019

मृत्यु

जब मैं मर जावउँग तब  क्यू दुखी होना
कर्जदार के मैयत में,,सिक्के नही उछाले जाते
बयाना जो बांकी है वो  बेफिक्र हो वसूल कर लो
हकदार की हकीकत से  जज़बात नही आंके जाते

मृत्यु से पहले

मृत्यु से पहले वो जिंदा था
या फिर शायद नहीं
वो मरने के बाद,,,,अब महसूस कर पाया
कि जिंदा है,,मर कर भी
अनुभव

Thursday, October 3, 2019

गांधी जी स्वर्ग में आश्वश्त होकर बस सोने ही जा रहे थे,,उनकी जयंती पे कम से कम एक दिन शराब बंदी और पशुवध हिंसा से मुक्त था,,और ठीक उसी वक्त पृथ्वी लोक से शोर उठा,,,मादर चोद,,, ठांय ठांय,, बुलठू भैया अपनी आखिरी छुरेबाजी के मुजायरे के बाद छाती में गोली खा कर औंधे पड़े थे,,,पर कातिल कांप रहा था,,, क्योंकि बुलठू पाठक मरते मरते भी बोला,, फेर आंहु मादर चोद,,रुक
                रायपुर शहर इन दिनों काफी बदल चुका है,,अस्सी के दशक में 10 थाना छेत्रों से

Monday, September 30, 2019

मुड़ी जो मुड़ी तो फिर मुड़ गई
उस्तरे से उस तरह से सारी चुन्दी उड़ गई

Saturday, September 28, 2019

बरहा और जेपरा

जेपरा औ बरहा,,
धकर लकर  झाड़ चघा,,औ झाड़ कौन ,,बमरी  ,,कांटा कुण्टी ले छेदा गया जेपरा,,लुंगी छूट गया रह गया ,,हरियर चड्डा और लटकता  नाड़ा,,,फेर नई उतरा,, काबर नीचे बरहा छेक के बैठा जो था,,घों घों करता ,,,,,,जेपरा का हाथ गोड़ खोर्रा गया था,,लहू बोहा रहा था,, घों घों ,,,सारा बेटा खेत मे खोन्दरा तान के,,पीला दे दिया,,,अब कर ले लुवाठ खेती किसानी
         धान खेत के बिच्चो बीच,,,जंगली सूरा का खोन्दरा,,जेपरा आवेदन धरे किंजर रहा,,ये आफिस ले ओ ऑफिस ,,तहसीलदार किथे,, जंगली जीव है माने बनविभाग का मामला,,,रेंजर साहेब बोले,, आधा नुकसानी में होता है मुमावजा  या फेर गोड़ हाथ तोड़वाये मे,,,खोरचाये हपटाये का कोई हिसाब नही,,, ,,जंगल गार्ड भेज के खेदवा देंगे, ,,दु हप्ता पहिले,,फेर वहा रे विधान आज ले कोई सुध नही ले रहा,, औ बरहा घेरी बेरी होदरने करता है,,,बिककट अल्हन है भाई,, सूरा मार सुतली बम में आटा लपेट के रात के डार दे,, सरपंच का आडिया है,, किसे करबे,,
            बिहिनिया खार में  सूरा छर्री दर्री पड़ा था,,,जबड़ा फूट गया ,,अब क्या,,, भून के मास खाओ खतम करो,,,जम्मो पंचायत खाया बांट के ,,फेर कम नही पड़ा तो सोखा दो,,बिककट मिठाया रहा,,जेन नई चखा ,,कल्लायेगा ही,,सब्बो अधिकारी एक्के दिन धावा मारा दिया,,,सोखडी मांस,,बयान,,मौका जांच,,पंचनामा,,, बनपशु को मारा,, है खाने खातिर,,,कौन कौन खाया सब्बो अंदर,,,होगा,,,,रेंगजर साहब धार्मिक मनखे था,, बिष्णु अवतार को मार दिया रे,,बराहा अवतार,,हा ,,हा ,,हा गम्भीर धारा लगेगा,,जेपरा उखरू बैठ के सोंच रहा था,,, मोला होदरत रिहिस तो ओखर उप्पर कोनो धारा नई,,वाह रे कानून एकतरफा, पेला रहा है,
       सरपंच गार्ड से गोठिया रहा है,,समाधान निकले साहब तो सब्बो का भला हो,,  मामला जम गया दिखता है,,, गरुवा डाक्टर पोस्टमार्टम कर दिया,,,देवार डेरा का देशी सूरा है,,,,जंगली पशु अधिनियम में नही आता,,,जेपरा का जान बच गया,,फेर धान,,, एक गाड़ा बेंच के हुआ ऊपर से निच्चे तक का  मुवावजा चुक्ता,, धान खेत ले अभी भी आवाज आता है,,घों घों,, फेर जेपरा अब नई भागता,,, क़ानून बोला है,,देशी सूरा है

अनुभव