सूरज के आते भोर हुआ, लाठी लेझिम का शोर हुआ।
यह नागपंचमी झम्मक-झम, यह ढोल-ढमाका ढम्मक-ढम।
हिंदी पाठ्य पुस्तकों की प्राथमिक कक्षा में सुधीर त्यागी जी की यह कविता सस्वर गाई जाती थी,,,सावन की पंचमी के दिन विद्यार्थी ,,खाखी हाफ पेंट और सफेद शर्ट पहने,,अपनी स्लेट पट्टी पर नाग नागिन जोड़े उकेरते बड़े मनोयोग से,,, ताजा खीरा और अगरबत्ती साथ ही चुटकी भर अबीर, की पुड़िया,,,और झुंड बना कर कूच करते ,,,स्कूल की ,ओर,,,मैदान के बीचों बीच ध्वजा रोहण की गोल वेदी पर टिके काले तख्ते को जिसे इस रोज खास तौर पर ,,काले कोयले से पोता जाता रहा,,,और कोई कुशल कलाकार शिक्षक,,,उसमें बड़े नाग नागिन का सफेद और अन्य रंगीन चाक से आकृति मनोयोग से बनाते,,,
Monday, August 17, 2026
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